सूर्य को समस्त रोगों का नाशक होता है लेकिन यदि सूर्य अशुभ हो और पीड़ित हो तो ये रोग भी देता है।।
Disease connected with Sun
(सूर्य से सम्बधिक्त रोग)
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पित्त रोग , पित्त प्रकृति , सामान्य स्वास्थ्य स्थिति , हृदय रोग , पेट के अंगों के रोग , हड्डियों के रोग , सिर दर्द , गंजापन , असहिष्णुता , बुखार , बदन दर्द , मसूड़े की सूजन , आंखों के रोग , पेट रोग , लिवर के रोग , पित्ताशय की बीमारी , कुछ प्रकार की त्वचा रोग , शस्त्रों का भय , विष का भय , रक्त प्रवाह से संबंधित रोग , असंवेदनशीलता , कुष्ठ रोग , टाइफाइड , तेज बुखार , मस्तिष्क में खून का आंतरिक स्राव , दरख्त से हुए घाव , शरीर में जलन ।
■ जब कमजोर या अशुभ सूर्य संबंधित राशियों या भावों में स्थित होता है तो उस राशियों या भावों से संबंधित रोग उस दशा या अन्तर्दशा में हो सकते हैं |
Organs connected
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1.Heart ( दिल / हृदय )
2.Right Eye ( दाहिनी आँख )
- Head ( सिर )
- Bones ( हड्डियाँ )
5.Stomach ( पेट )
■जब सूर्य 6,8,12 बे भाव के स्वामी हो कर जिस भाव (हाउस)मे होगा उससे सम्बधिक्त अंग में रोग की सम्भवना रहता है।।
■ कुंडली में यदि सूर्य रोग कारक ग्रह हो तो ऐसे रोग शरीर के एक या अधिक अंगों में हो सकते हैं ।
अशुभ प्रभाव
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★यदि 10 वां भाव पीड़ित है तब बीमारी स्वयं रोगी की गलती के कारण बढ़ जाएगी । अथवा रोगी पर ध्यान देने की आवश्यकता है ।
★यदि – 3 , 6 , 9 , 12 अथवा आपोक्लीम भावों में क्रूर ग्रह हों तो बीमारी वंशानुगत है ।
★यदि ये क्रूर ग्रह स्वयं भी पाप ग्रहों से दृष्ट है तब दुःखदँ परिस्थितियों में मृत्यु हो सकती है ।
■वक्री ग्रह लग्न में वक्री ग्रह – चिकित्सक का बदलाव ।
■4 थे भाव में वक्री ग्रह चिकित्सा में बदलाव | –
■ 7 वें भाव में वक्री ग्रह बीमारी संदिग्ध बीमारी की अपेक्षा दूसरी है ।
■ 4 थे भाव अथवा 7 वें भाव में स्थित एक वक्री ग्रह भी बीमारी का पुनः प्रकट होना बताता है
1■मेष राशि में सूर्य- याददाश्त में कमी , चेतना की हानि ( झपका ) , मस्तिष्क को प्रभावित करने वाले रोग , दृष्टि को प्रभावित करने वाले रोग , मिर्गी , मस्तिष्क में रक्तस्राव , रक्त वाहिकाओं में रुकावट , सिरदर्द
2■सूर्य वृष राशि में चेहरे के रोग , गले के रोग , आँखों के रोग , नाक के रोग , मुँह के रोग ।
3■मिथुन राशि में सूर्य- फेफड़े , दमा , फुफ्फुस के रोग
4■कर्क राशि में सूर्य – पीलापन ( एनीमिया ) , ऐल्बिनिज़म ( सफेद कुष्ठ रोग ) , पेट दर्द |
5■ सिंह राशि में सूर्य- हृदय रोग , कमर दर्द , रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करने वाले रोग , रात का अंधापन ( निक्टालोपिया ) , रंग से सम्बंधित अंधापन ।
6■कन्या राशि में सूर्य – बड़ा पेट , टाइफाइड , पेचिश
7■तुला राशि में सूर्य- मूत्र मार्ग में संक्रमण , मूत्राशय में पथरी , प्रोस्ट्रेट , जलना , अग्नि का भय , शस्त्रों का भय , विष का भय