बीमारीजिंदगी पर प्रभाव

{ मंगल के मंदे फलबीमारीजिंदगी पर प्रभाव }

मंगल रक्त का प्रतिनिधित्व करता है परन्तु जिनका मंगल कमजोर होता है रक्त की बीमारियों के अतिरिक्त जोश की कमी होगी। ऐसे व्यक्ति हर काम को धीरे धीरे करेंगे। वह जातक सुस्त दिखाई देगा और किसी भी काम को सही ऊर्जा से नहीं कर पाता। खराब मंगल से चोट चपेट और दुर्घटना आदि का भय बना रहता है।

1.नेत्र रोग।

  1. उच्च रक्तचाप।
    3.वात रोग।
  2. गठिया रोग।
    5.फोड़े-फुंसी होते हैं।
  3. जख्मी या चोट।
  4. बार-बार बुखार आता रहता है।
    8.शरीर में कंपन होता रहता है।
  5. गुर्दे में पथरी हो जाती है।
  6. आदमी की शारीरिक ताकत कम हो जाती है।
    11.एक आंख से दिखना बंद हो सकता है।
  7. शरीर के जोड़ काम नहीं करते हैं।
  8. मंगल से रक्त संबंधी बीमारी होती है। रक्त की कमी अशुद्धि हो जाती है।
  9. बच्चे पैदा करने में तकलीफ। हो भी जाते हैं तो बच्चे जन्म होकर मर जाते हैं।
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    { बुध के मंदे फलबीमारीजिंदगी पर प्रभाव }

बुध व्यक्ति को चालाक और धूर्त बनाता है। आज यदि आप चालाक नहीं हैं तो दुसरे लोग आपका हर दिन लाभ उठाएंगे। जो भोले भाले लोग होते हैं उनका बुध अवश्य ही कमजोर होता है और खराब बुध से व्यक्ति को चर्म रोग अधिक होते हैं। सांस की बीमारियां बुध के दूषित होने से होती हैं। बहुत खराब बुध से व्यक्ति के फेफड़े खराब होने का भय रहता है। व्यक्ति हकलाता है तो भी बुध के कारण और गूंगा बहरापन भी बुध के कारण ही होता है।

  • गुप्त रोग हो सकता है।
  • नाखून और बाल कमजोर हो जाते हैं।
  • पाचन क्षमता पर असर पड़ता है।
  • सूंघने की शक्ति क्षीण हो जाती है।
  • दांत कमजोर हो जाते हैं।
  • व्यक्ति की वाक् क्षमता भी जाती रहती है।
    *खराब बुध के कारण व्यक्ति की निर्णय क्षमता कमजोर हो जाती है और उसका अपनी वाणी पर नियंत्रण नहीं रहता।
    *वाणी खराब होने पर उसके अपने ही उसके विरोध में खड़े हो जाते हैं।
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    { बृहस्पति के मंदे फलबीमारीजिंदगी पर प्रभाव }

गुरु ग्रह बृहस्पति इंसान की जिंदगी पर गहरा असर छोड़ता है. अगर आपकी कुंडली में बृहस्पति कमजोर हो, तो परेशानियां बढ़ती चली जाती हैं।क्योंकि किसी भी चीज को बृहस्पति विशाल रूप देता है।

*गुरु के बुरे प्रभाव से धरती की आबोहवा बदल जाती है। उसी प्रकार व्यक्ति के शरीर की हवा भी बुरा प्रभाव देने लगती है।
*इससे श्वास रोग, वायु विकार, फेफड़ों में दर्द आदि होने लगता है।
*कुंडली में गुरु-शनि, गुरु-राहु और गुरु-बुध जब मिलते हैं तो अस्थमा, दमा, श्वास आदि के रोग, गर्दन, नाक या सिर में दर्द भी होने लगता है।
*इसके अलावा गुरु की राहु, शनि और बुध के साथ युति अनुसार भी बीमारियां होती हैं, जैसे- पेचिश, रीढ़ की हड्डी में दर्द, कब्ज, रक्त विकार, कानदर्द, पेट फूलना, जिगर में खराबी आदि।
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{ शुक्र के मंदे फलबीमारीजिंदगी पर प्रभाव }

शुक्र हमारे जीवन में स्त्री, वाहन और धन सुख को प्रभावित करता है। यह एक स्त्री ग्रह है। पुरुष के लिए स्त्री और स्त्री के लिए पुरुष शुक्र है। हिन्दू धर्म में लक्ष्मी, काली और गुरु शुक्राचार्य को शुक्र ग्रह से संबंधित माना जाता है।

*घर की दक्षिण-पूर्व दिशा को वास्तु अनुसार ठीक करवाएं।

  • शरीर में गाल, ठुड्डी और नसों से शुक्र का संबंध माना जाता है।
  • शुक्र के खराब होने से वीर्य की कमी भी हो जाती है। इससे किसी भी प्रकार का यौन रोग हो सकता है या व्यक्ति में कामेच्छा समाप्त हो जाती है।
  • लगातार अंगूठे में दर्द का रहना या बिना रोग के ही अंगूठे का बेकार हो जाना शुक्र के खराब होने की निशानी है।
  • शुक्र के खराब होने से शरीर में त्वचा संबंधी रोग उत्पन्न होने लगते हैं।
  • अंतड़ियों के रोग।
  • गुर्दे का दर्द
  • पांव में तकलीफ आदि।
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    { केतु के मंदे फलबीमारीजिंदगी पर प्रभाव }

केतु ग्रह न होकर ग्रह की छाया है, हमारी धरती की छाया या धरती पर पड़ने वाली छाया। छाया का हमारे जीवन में बहुत असर होता है। कहते हैं कि रोज पीपल की छाया में सोने वाले को किसी भी प्रकार का रोग नहीं होता लेकिन यदि बबूल की छाया में सोते रहें तो दमा या चर्म रोग हो सकता है। इसी तरह ग्रहों की छाया का हमारे जीवन में असर होता है।

  • पेशाब की बीमारी।
  • संतान उत्पति में रुकावट।
  • सिर के बाल झड़ जाते हैं।
  • शरीर की नसों में कमजोरी आ जाती है।
  • केतु के अशुभ प्रभाव से चर्म रोग होता है।
  • कान खराब हो जाता है या सुनने की क्षमता कमजोर पड़ जाती है।
  • कान, रीढ़, घुटने, लिंग, जोड़ आदि में समस्या उत्पन्न हो जाती है।

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{ चंद्र के मंदे फलबीमारीजिंदगी पर प्रभाव }
जितने भी दूध वाले वृक्ष हैं सभी चन्द्र के कारण उत्पन्न हैं। चन्द्रमा बीज, औषधि, जल, मोती, दूध, अश्व और मन पर राज करता है। लोगों की बेचैनी और शांति का कारण भी चन्द्रमा है।

चन्द्रमा माता का सूचक और मन का कारक है। कुंडली में चन्द्र के अशुभ होने पर मन और माता पर प्रभाव पड़ता है।

  • चन्द्र में मुख्य रूप से दिल, बायां भाग से संबंध रखता है।
  • मिर्गी का रोग।
  • पागलपन।
  • बेहोशी।
  • फेफड़े संबंधी रोग।
  • मासिक धर्म गड़बड़ाना।
  • स्मरण शक्ति कमजोर हो जाती है।
  • मानसिक तनाव और मन में घबराहट।
  • तरह-तरह की शंका और अनिश्चित भय।
  • सर्दी-जुकाम बना रहता है।
  • व्यक्ति के मन में आत्महत्या करने के विचार बार-बार आते रहते हैं।
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    { राहु के मंदे फलबीमारीजिंदगी पर प्रभाव }

राहु ग्रह न होकर ग्रह की छाया है, हमारी धरती की छाया या धरती पर पड़ने वाली छाया। छाया का हमारे जीवन में बहुत असर होता है।

कहते हैं कि रोज पीपल की छाया में सोने वाले को किसी भी प्रकार का रोग नहीं होता लेकिन यदि बबूल की छाया में सोते रहें तो दमा या चर्म रोग हो सकता है। इसी तरह ग्रहों की छाया का हमारे जीवन में असर होता है।

राहु ग्रह हमारी बुद्धि का कारण है, लेकिन जो ज्ञान हमारी बुद्धि के बावजूद पैदा होता है उसका कारण राहु है।

*गैस प्रॉब्लम।

  • बाल झड़ना
  • उदर रोग।
  • बवासीर।
  • पागलपन।
  • राजयक्ष्मा रोग।
  • निरंतर मानसिक तनाव बना रहेगा।
  • नाखून अपने आप ही टूटने लगते हैं।
  • मस्तिष्क में पीड़ा और दर्द बना रहता है।
  • राहु व्यक्ति को पागलखाने, दवाखाने या जेलखाने भेज सकता है।
  • राहु अचानक से भी कोई बड़ी बीमारी पैदा कर देता है और व्यक्ति मृत्यु को प्राप्त हो जाता है।
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    { शनि के मंदे फलबीमारीजिंदगी पर प्रभाव }

यदि सूर्य और चन्द्र को छोड़कर बात करें तो बड़े और प्रभावशील ग्रहों में वैसे गुरु के बाद शनि को रखा जाना चाहिए, लेकिन हमने शुक्र को रखा, क्योंकि उसका प्रभाव धरती पर सबसे ज्यादा रहता है और शनि का प्रभाव निश्चित दिनों और माह में होता है।

हालांकि जब शनि अपने प्रभाव में आता है तो व्यक्ति से सबकुछ छीनकर चला जाता है। अगले ढाई वर्ष के बाद फिर आता है

  • शनि का संबंध मुख्‍य रूप से दृष्टि, बाल, भवें और कनपटी से होता है।
  • समय पूर्व आंखें कमजोर होने लगती हैं और भवों के बाल झड़ जाते हैं।
  • कनपटी की नसों में दर्द बना रहता है।
  • समय पूर्व ही सिर के बाल झड़ जाते हैं।
  • फेफड़े सिकुड़ने लगते हैं और तब सांस लेने में तकलीफ होती है।
  • हड्डियां कमजोर होने लगती हैं, तब जोड़ों का दर्द भी पैदा हो जाता है।
  • रक्त की कमी और रक्त में बदबू बढ़ जाती है।
  • पेट संबंधी रोग या पेट का फूलना।
  • सिर की नसों में तनाव।
  • अनावश्यक चिंता और घबराहट बढ़ जाती है।
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