पुनर्जन्म ( Reincarnation )पिछले जन्म में आप क्या थे ?

कहते हैं कि कुंडली में आपके पिछले जन्म की स्थिति लिखी होती है। यह कि आप पिछले जन्म में क्या थे। कुंडली, हस्तरेखा या सामुद्रिक विद्या का जानकार व्यक्ति आपके पिछले जन्म की जानकारी के सूत्र बता सकता है। यह लेख ज्योतिष की मान्यता पर आधारित है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब भी कोई जातक पैदा होता है तो वह अपनी भुक्त और भोग्य दशाओं के साथ पिछले जन्म के भी कुछ सूत्र लेकर आता है। ऐसा कोई भी जातक नहीं होता है, जो अपनी भुक्त दशा और भोग्य दशा के शून्य में पैदा हुआ हो।

ज्योतिष धारणा के अनुसार मनुष्य के वर्तमान जीवन में जो कुछ भी अच्छा या बुरा अनायास घट रहा है, उसे पिछले जन्म का प्रारब्ध या भोग्य अंश माना जाता है। पिछले जन्म के अच्छे कर्म इस जन्म में सुख दे रहे हैं या पिछले जन्म के पाप इस जन्म में उदय हो रहे हैं, यह खुद का जीवन देखकर जाना जा सकता है। हो सकता है इस जन्म में हम जो भी अच्छा या बुरा कर रहे हैं, उसका खामियाजा या फल अगले जन्म में भोगेंगे या पाप के घड़े को तब तक संभाले रहेंगे, जब तक कि वह फूटता नहीं है। हो सकता है इस जन्म में किए गए अच्छे या बुरे कर्म अगले जन्म तक हमारा पीछा करें।

  1. ज्योतिष के अनुसार जातक के लग्न में उच्च या स्वराशि का बुध या चंद्र स्थिति हो तो यह उसके पूर्व जन्म में सद्गुणी व्यापारी होने का सूचक है। लग्नस्थ बुध है तो वणिक पुत्र होकर विविध क्लेशों से ग्रस्त था।
  2. किसी जातक की कुंडली के लग्न स्थान में मंगल उच्च राशि या स्वराशि में स्थित हो तो इसका अर्थ है कि वह पूर्व जन्म में योद्धा था। यदि मंगल षष्ठ, सप्तम या दशम भाव में है तो यह माना जाता है कि जातक पूर्वजन्म में बहुत क्रोधी स्वभाव का था।
  3. यदि जातक की कुंडली में 4 या इससे अधिक ग्रह उच्च राशि के अथवा स्वराशि के हों तो यह माना जाता है कि जातक उत्तम योनि या जीवन भोगकर यहां जन्म लिया है।
  4. यदि जातक की कुंडली में 4 या इससे अधिक ग्रह नीच राशि के हों तो ऐसा माना जाता है कि जातक ने पूर्वजन्म में निश्चय ही आत्महत्या की होगी।
  5. यदि जातक की कुंडली में लग्नस्थ गुरु है तो माना जाता है कि जन्म लेने वाला जातक बहुत ज्यादा धार्मिक स्वाभाव का था। यदि जातक की कुंडली में कहीं भी उच्च का गुरु होकर लग्न को देख रहा हो तो माना जाता है कि जातक पूर्वजन्म में धर्मात्मा, सद्गुणी एवं विवेकशील साधु अथवा तपस्वी था। गुरु शुभ ग्रहों से दृष्ट हो या पंचम या नवम भाव में हो तो भी उसे संन्यासी माना जाता है।
  6. यदि कुंडली में सूर्य छठे, आठवें या बारहवें भाव में हो अथवा तुला राशि का हो तो माना जाता है कि जातक पूर्वजन्म में भ्रष्ट जीवन जीकर जन्मा है।
  7. यदि जातक की कुंडली में लग्न या सप्तम भाव में शुक्र ग्रह हो तो माना जाता है कि जातक पूर्वजन्म में जीवन के सभी सुखों को भोगने वाला राजा अथवा सेठ था।
  8. यदि जातक की कुंडली में लग्न, एकादश, सप्तम या चौथे भाव में शनि हो तो यह माना जाता है कि जातक पूर्वजन्म में पापपूर्ण कार्यों में लिप्त था।
  9. यदि जातक की कुंडली में लग्न या सप्तम भाव में राहु हो तो यह माना जाता है कि जातक की मृत्यु स्वभाविक रूप से नहीं हुई होगी।
  10. यदि जातक की कुंडली में ग्यारहवें भाव में सूर्य, पांचवें में गुरु तथा बारहवें में शुक्र है तो माना जाता है कि जातक पूर्वजन्म में धर्मात्मा प्रवृत्ति का तथा लोगों की मदद करने वाला था।

जो जन्मा है वह मरेगा ही चाहे वह मनुष्‍य हो, देव हो, पशु या पक्षी सभी को मरना है। ग्रह और नक्षत्रों की भी आयु निर्धारित है और हमारे इस सूर्य की भी। पुनर्जन्म की धारणा सिर्फ भारत के धर्मों में ही पाई जाती है जबकि पश्चिम के धर्म इस सिद्धांत को नहीं मानेत हैं। परंतु सवाल यह है कि क्या मृत्यु के बाद पुनर्जन्म मिलता है और पुनर्जन्म आखिर होता क्या है।

  1. 30 सेकंड में अगला जन्म : उपनिषदों के अनुसार एक क्षण के कई भाग कर दीजिए उससे भी कम समय में आत्मा एक शरीर छोड़ तुरंत दूसरे शरीर को धारण कर लेता है। यह सबसे कम समयावधि है। सबसे ज्यादा समायावधि है 30 सेकंड। परंतु पुराणों के अनुसार यह समय लंबा की हो सकता है 3 दिन, 13 दिन, सवा माह या सवाल साल। इससे ज्यादा जो आत्मा नया शरीर धारण नहीं कर पाती है वह मुक्ति हेतु धरती पर ही भटकती है, स्वर्गलोक चली जाती है, पितृलोक चली जाती है या अधोलोक में गिरकर समय गुजारती है।
  2. प्राणवायु से जुड़ा संबंध : सूक्ष्म शरीर को धारण किए हुए आत्मा का स्थूल शरीर के साथ बार-बार संबंध टूटने और बनने को पुनर्जन्म कहते हैं। इसका उत्तर जन्म के उत्तर में ही छिपा हुआ है। दरअसल, सूक्ष्म शरीर और स्थूल शरीर के बीच जो प्राणों का संबंध स्थापित है उसका संबंध टूट जाना ही मृत्यु है और उसका जुड़ जाना ही पुनर्जन्म है।
  3. मुक्त जरूरी : कर्म और पुनर्जन्म एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। कर्मों के फल के भोग के लिए ही पुनर्जन्म होता है तथा पुनर्जन्म के कारण फिर नए कर्म संग्रहीत होते हैं। इस प्रकार पुनर्जन्म के दो उद्देश्य हैं- पहला, यह कि मनुष्य अपने जन्मों के कर्मों के फल का भोग करता है जिससे वह उनसे मुक्त हो जाता है। दूसरा, यह कि इन भोगों से अनुभव प्राप्त करके नए जीवन में इनके सुधार का उपाय करता है जिससे बार-बार जन्म लेकर जीवात्मा विकास की ओर निरंतर बढ़ती जाती है तथा अंत में अपने संपूर्ण कर्मों द्वारा जीवन का क्षय करके मुक्तावस्था को प्राप्त होती है।
  4. दूसरे जन्म की जाति: पुनर्जन्म के बाद मिलती है कौनसी योनी यह सभी सोचते होंगे। जन्म को जाति भी कहा जाता है। जैसे उदाहरणार्थ.: वनस्पति जाति, पशु जाति, पक्षी जाति और मनुष्य जाति। कर्मों के अनुसार जीवात्मा जिस शरीर को प्राप्त होता है वह उसकी जाति कहलाती है। यदि अच्छे कर्म किए हैं तो कम से कम मनुष्‍य से नीचे की जाति नहीं मिलेगी। बुरे कर्म किए हैं तो कोई गारंटी नहीं।
  5. पुनर्जन्म पर शोध : गीता प्रेस गोरखपुर ने भी अपनी एक किताब ‘परलोक और पुनर्जन्मांक’ में ऐसी कई घटनाओं का वर्णन किया है जिससे पुनर्जन्म होने की पुष्टि होती है। वेदमूर्ति तपोनिष्ठ पं. श्रीराम शर्मा ‘आचार्य’ ने एक किताब लिखी है, ‘पुनर्जन्म : एक ध्रुव सत्य।’ इसमें पुनर्जन्म के बारे में अच्छी विवेचना की गई है। पुनर्जन्म में रुचि रखने वाले को ओशो की किताबें जैसे ‘विज्ञान भैरव तंत्र’ के अलावा उक्त दो किताबें जरूर पढ़ना चाहिए। ओशो रजनीश ने पुनर्जन्म पर बहु‍त अच्छे प्रवचन दिए हैं। उन्होंने खुद के भी पिछले जन्मों के बारे में विस्तार से बताया है। इसी प्रकार बेंगलुरु की नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ मेंटल हेल्थ एंड न्यूरो साइंसेज में क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट के रूप में कार्यरत डॉ. सतवंत पसरिया द्वारा इस विषय पर शोध किया गया था। उन्होंने अपने इस शोध को एक किताब का रूप दिया जिसका नाम है- ‘श्क्लेम्स ऑफ रिइंकार्नेशनरू एम्पिरिकल स्टी ऑफ कैसेज इन इंडियास।’ इस किताब में 1973 के बाद से भारत में हुई 500 पुनर्जन्म की घटनाओं का उल्लेख मिलता है। आधुनिक युग में पुनर्जन्म पर अमेरिका की वर्जीनिया यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिक डॉ. इयान स्टीवेंसन ने 40 साल तक इस विषय पर शोध करने के बाद एक किताब ‘रिइंकार्नेशन एंड बायोलॉजी’ लीखी थी जिसे सबसे महत्वपूर्ण शोध किताब माना गया है।
  6. आठ कारणों से लेती आत्मा पुनर्जन्म:-
  7. भगवान की आज्ञा से : भगवान किसी विशेष कार्य के लिए महात्माओं और दिव्य पुरुषों की आत्माओं को पुन: जन्म लेने की आज्ञा देते हैं।
  8. पुण्य समाप्त हो जाने पर : संसार में किए गए पुण्य कर्म के प्रभाव से व्यक्ति की आत्मा स्वर्ग में सुख भोगती है और जब तक पुण्य कर्मों का प्रभाव रहता है, वह आत्मा दैवीय सुख प्राप्त करती है। जब पुण्य कर्मों का प्रभाव खत्म हो जाता है तो उसे पुन: जन्म लेना होता है।
  9. पुण्य फल भोगने के लिए : कभी-कभी किसी व्यक्ति द्वारा अत्यधिक पुण्य कर्म किए जाते हैं और उसकी मृत्यु हो जाती है, तब उन पुण्य कर्मों का फल भोगने के लिए आत्मा पुन: जन्म लेती है।
  10. पाप का फल भोगने के लिए।
  11. बदला लेने के लिए : आत्मा किसी से बदला लेने के लिए पुनर्जन्म लेती है। यदि किसी व्यक्ति को धोखे से, कपट से या अन्य किसी प्रकार की यातना देकर मार दिया जाता है तो वह आत्मा पुनर्जन्म अवश्य लेती है।
  12. बदला चुकाने के लिए।
  13. अकाल मृत्यु हो जाने पर।
  14. अपूर्ण साधना को पूर्ण करने के लिए।

7.इस तरीके से जाने आप अपना पिछला जन्म : इसे जाति स्मरण का प्रयोग कहते हैं। इसके बारे में तो आपने पढ़ा ही होगा। जब चित्त स्थिर हो जाए अर्थात मन भटकना छोड़कर एकाग्र होकर श्वासों में ही स्थिर रहने लगे, तब जाति स्मरण का प्रयोग करना चाहिए। जाति स्मरण के प्रयोग के लिए ध्यान को जारी रखते हुए आप जब भी बिस्तर पर सोने जाएं तब आंखे बंद करके उल्टे क्रम में अपनी दिनचर्या के घटनाक्रम को याद करें। जैसे सोने से पूर्व आप क्या कर रहे थे, फिर उससे पूर्व क्या कर रहे थे तब इस तरह की स्मृतियों को सुबह उठने तक ले जाएं। दिनचर्या का क्रम सतत जारी रखते हुए ‘मेमोरी रिवर्स’ को बढ़ाते जाए। ध्यान के साथ इस जाति स्मरण का अभ्यास जारी रखने से कुछ माह बाद जहां मोमोरी पॉवर बढ़ेगा, वहीं नए-नए अनुभवों के साथ पिछले जन्म को जानने का द्वार भी खुलने लगेगा। जैन धर्म में जाति स्मरण के ज्ञान पर विस्तार से उल्लेख मिलता है। इसके अलावा योग में अ‍ष्टसिद्धि के अलावा अन्य 40 प्रकार की सिद्धियों का वर्णन मिलता है। उनमें से ही एक है पूर्वजन्म ज्ञान सिद्धि योग। इस योग की साधना करने से व्यक्ति को अपने अगले पिछले सारे जन्मों का ज्ञान होने लगता है। यह साधना कठिन जरूर है, लेकिन योगाभ्यासी के लिए सरल है। सम्मोहन क्रिया से भी पिछला जन्म जाना जा सकता है।

  1. मरने के बाद कौन कहां चला जाता है : यजुर्वेद में कहा गया है कि शरीर छोड़ने के पश्चात्य, जिन्होंने तप-ध्यान किया है वे ब्रह्मलोक चले जाते हैं अर्थात ब्रह्मलीन हो जाते हैं। कुछ सतकर्म करने वाले भक्तजन स्वर्ग चले जाते हैं। स्वर्ग अर्थात वे देव बन जाते हैं। राक्षसी कर्म करने वाले कुछ प्रेत योनि में अनंतकाल तक भटकते रहते हैं और कुछ पुन: धरती पर जन्म ले लेते हैं। जन्म लेने वालों में भी जरूरी नहीं कि वे मनुष्य योनि में ही जन्म लें। गति कई प्रकार की होती है। प्रेतयोनि में जाना एक दुर्गति है।
  2. जन्म चक्र:- पुराणों के अनुसार व्यक्ति की आत्मा प्रारंभ में अधोगति होकर पेड़-पौधे, कीट-पतंगे, पशु-पक्षी योनियों में विचरण कर ऊपर उठती जाती है और अंत में वह मनुष्य वर्ग में प्रवेश करती है। मनुष्य अपने प्रयासों से देव या दैत्य वर्ग में स्थान प्राप्त कर सकता है। वहां से पतन होने के बाद वह फिर से मनुष्य वर्ग में गिर जाता है। यदि आपने अपने कर्मों से मनुष्य की चेतना के स्तर से खुद को नीचे गिरा लिया है तो आप फिर से किसी पक्षी या पशु की योनी में चले जाएंगे। यह क्रम चलता रहता है। अर्थात व्यक्ति नीचे गिरता या कर्मों से उपर उठता चला जाता है।
  3. प्रारब्ध कर्म:- यही कारण है कि व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार जीवन मिलता है और वह अपने कर्मों का फल भोगता रहता है। यही कर्मफल का सिद्धांत है। ‘प्रारब्ध’ का अर्थ ही है कि पूर्व जन्म अथवा पूर्वकाल में किए हुए अच्छे और बुरे कर्म जिसका वर्तमान में फल भोगा जा रहा हो। विशेषतया इसके 2 मुख्य भेद हैं कि संचित प्रारब्ध, जो पूर्व जन्मों के कर्मों के फलस्वरूप होता है और क्रियमान प्रारब्ध, जो इस जन्म में किए हुए कर्मों के फलस्वरूप होता है। इसके अलावा अनिच्छा प्रारब्ध, परेच्छा प्रारब्ध और स्वेच्छा प्रारब्ध नाम के 3 गौण भेद भी हैं। प्रारब्ध कर्मों के परिणाम को ही कुछ लोग भाग्य और किस्मत का नाम दे देते हैं। पूर्व जन्म और कर्मों के सिद्धांत को समझना जरूरी है।

मिलने लगे ये 10 संकेत तो समझ जाएं दोबारा हुआ है आपका जन्म :

कई लोगों को सपने में कुछ पुरानी बातें याद आती हैं। उन्हें लगता है कि वो उस घटना को होते हुए या किसी व्यक्ति एवं जगह को पहले से जानते हैं। जेहन में बिखरी यही यादें पुर्नजन्म का संकेत हो सकती हैं। तो कौन-से हैं वो इशारे जो व्यक्ति को बताते हैं कि उसका दोबारा जन्म हुआ है, आइए जानते हैं।

1.जो लोग पुर्नजन्म लेते हैं उनके मन में अक्सर कोई डर बना रहता है। उन्हें किसी चीज के होने का एहसास होता है। ऐसे लोग अपने भूतकाल में जीते हैं। कई बार तो वे अपने अतीत से इतना प्रभावित होते हैं कि वो अपनी पिछली हरकतें दोहराने लगते हैं।

2.पुर्नजन्म का सबसे बडा संकेत सपनों का आना होता है। दोबारा जन्म लेने वाले लोगों को अक्सर एक ही तरह के सपने आते रहते हैं। उन्हें या तो किसी दुर्घटना का, शादी का या उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ अन्य घटनाएं दिखने लगती हैं।

3.दोबारा जन्मे लोगों को अक्सर किसी खास जगह से बहुत लगाव होता है। मगर हैरानी कि बात तो यह है कि वे उस जगह कभी गए नहीं होते हैं न ही वहां के बारे में सुना होता है, लेकिन उन्हें उस जगह की सारी बातें पता होती हैं।

4.जो लोग पुनर्जन्म लेते हैं उनमें से कई लोगों को अनहोनी के होने का एहसास हो जाता है। जिसके चलते उनका बर्ताव एक समान नहीं रहता है। ऐसे लोग डरकर रहते हैं। इन्हें बहुत ज्यादा बेचैनी होती है।
5.जिन लोगों का पुर्नजन्म होता है उन्हें कई बार अपने पिछले जन्म के भाई-बहन, पति-पत्नी, प्रेमी-प्रेमिका, माता-पिता एवं अन्य संबंध याद आते हैं। ऐसे में वो वर्तमान में दोबारा उनके पास जाने की जिद करने लगते हैं।

6.पुर्नजन्म का एक अन्य अहम संकेत है कि ऐसे व्यक्तियों की आदतें काफी अलग होती हैं। उनके स्वभाव में पिछले जन्म की आदतों की काफी छाप होती है। तभी कई लोग ऐसे काम कर जाते हैं जिनका उन्हें खुद एहसास नहीं होता है।

7.पुर्नजन्म लेने वाले व्यक्ति अपने पिछले जीवन से इतना ज्यादा जुड़े होते हैं कि वो कोई बात भूल नहीं पाते हैं। अगर उनके साथ कुछ गलत हुआ होता है तो वो अक्सर उन यादों को याद करके उदास हो जाते हैं।

8.दोबार जन्म लेने वाले लोगों की एक और खासियत होती है कि उन्हें पिछला ज्ञान भी विरासत में मिलता है। ऐसे लोग वर्तमान में भले ही कोई काम करने में अक्षम हो, लेकिन वे अपने पूर्व ज्ञान के आधार पर उस कार्य को बिना सीखे बखूबी कर लेते हैं।

9.जो लोग दोबारा जन्म लेते हैं उनकी इंद्रिया काफी सक्रिय रहती हैं। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक ऐसे लोग भूत और भविष्य में जीते हैं, इसलिए इनका सीधा संपर्क भगवान से होता है। ऐसे लोग भविष्य में होने वाली चीजों का आभास जल्दी कर लेते हैं।

क्यों अब्राहम लिंकन बने चार्ल्स लिंडबर्ग :

विश्व की कई सभ्यताओं में पुनर्जन्म की कहानी प्रसिद्ध है। अब्राहम लिंकन अमेरिकी इतिहास के सबसे प्रसिद्ध व्यक्तियों में एक हैं। उनका पुनर्जन्म चार्ल्स लिंडबर्ग के रूप में हुआ। दोनों व्यक्तियों के जीवन में गजब समानताएं हैं। इस सच्ची घटना के सबूतों से आपको भी विश्वास हो जाएगा कि अच्छे कामों का फल मिलता जरूर है।

पुनर्जन्म की घटना के पीछे प्रकृति के कर्म-चक्र का रहस्य माना जाता है। मतलब अगर आपके द्वारा किये गए अच्छे या बुरे कर्मों का फल किसी कारण से आपको इस जन्म में नहीं मिल पाया तो उन कर्मों के शुभ-अशुभ फल का हिसाब बाकी रह जाता है। अगले जन्म में आपको उसका फायदा या नुकसान भुगतना ही पड़ता है।

Q: पुनर्जन्म का सिद्धांत किस उपनिषद में है

A: पुनर्जन्म का सिद्धांत वृहदारण्यक उपनिषद और छान्दोग्य उपनिषद में है।

Q: पुनर्जन्म का सिद्धांत किस वेद में है

A: पुनर्जन्म का सिद्धांत ऋग्वेद, यजुर्वेद, अथर्ववेद में है।

– अमेरिका के पहले राष्ट्रपति Abraham Lincoln के जीवन की कहानी हम सबने पढ़ीं हैं कि कितनी कठिनाइयों का सामना करने के बाद अब्राहम लिंकन अमेरिका के राष्ट्रपति बने और राष्ट्रपति बनने के बाद भी उनका कार्यकाल बेहद संघर्षपूर्ण रहा।

– उनके कड़े संघर्ष और प्रयासों से संयुक्त राज्य अमेरिका की नींव पड़ी और अश्वेतों (Blacks) के मानवाधिकारों की रक्षा हुई। मगर जब स्थितियां कुछ सामान्य हुई तो अचानक एक दिन अब्राहम लिंकन की मृत्यु एक हत्यारे के हाथों हो गयी।

– सन 1946 में महान भारतीय संत श्री परमहंस योगानन्द जी ने अपने एक भाषण के दौरान अब्राहम लिंकन के पुनर्जन्म की कहानी बताई और वास्तविक तथ्यों के सबूत से इस बात को सिद्ध भी किया।

– स्वामी श्री परमहंस योगानन्द के इस वक्तव्य की सत्यता विश्व के कई विद्वानों ने जांची-परखी और आश्चर्यजनक रूप से सत्य पाया. इन्टरनेट, YouTube पर इस विषय से सम्बंधित ढेरों लेख और विडियो उपलब्ध हैं।

– स्वामी श्री परमहंस योगानन्द ने बताया कि अब्राहम लिंकन अपने पूर्व-जन्म में हिमालय में रहने वाले एक योगी थे, जिनकी मृत्यु के पहले अंतिम इच्छा जातीय और नस्लवादी भेदभाव (Racial Discrimination) को खत्म करना था। अपने इसी उद्देश्य की पूर्ति के लिए उन महान योगी का दूसरा जन्म अब्राहम लिंकन के रूप में हुआ।

– उस महान योगी ने अब्राहम लिंकन का जन्म लेकर अच्छी तरह से अपने लक्ष्य को पूरा किया और कर्तव्यों का पालन किया मगर असामयिक मृत्यु से उन्हें उनके अच्छे कर्मों का फल मिलना बाकी रह गया।

– कर्म-चक्र का नियम फिर चला और अब्राहम लिंकन का पुनर्जन्म चार्ल्स लिंडबर्ग के रूप में हुआ।

– चार्ल्स लिंडबर्ग (Charles Lindbergh) एक प्रसिद्ध अमेरिकी पायलट, खोजकर्ता, लेखक, अविष्कारक, मिलिट्री ऑफिसर, पर्यावरणविद और समाजसेवी थे।

– चार्ल्स लिंडबर्ग का जन्म 4 फरवरी 1902 को हुआ था जबकि अब्राहम लिंकन का जन्म 12 फरवरी 1809 को हुआ था।

– जब चार्ल्स लिंडबर्ग 25 साल के थे तो कुछ ऐसा हुआ जिससे वह रातों रात गुमनामी के दौर से शोहरत के शिखर पर पहुँच गए।

– चार्ल्स लिंडबर्ग पहले ऐसे व्यक्ति थे जिन्होंने इतिहास में पहली बार अमेरिका से पेरिस की यात्रा नॉन स्टॉप विमान चला कर पूरी की थी. इस यात्रा की कुल दूरी 5800 किलोमीटर की थी जिसे चार्ल्स लिंडबर्ग ने 33 घंटे 30 मिनट में पूरी की। इस ऐतिहासिक अभियान के लिए चार्ल्स लिंडबर्ग को अमेरिकी सेना का शीर्ष मेडल Medal of Honor दिया गया।

अब्राहम लिंकन और चार्ल्स लिंडबर्ग में अद्भुत समानताएं | Punar janam ki kahani

1) दोनों की लंबाई और वजन लगभग समान थे। दोनों की आँखों का रंग नीला (Blue) था और हेयर स्टाइल एक जैसी थी। दोनों ही व्यक्ति खड़े होने पर थोड़ा सा आगे की ओर झुके रहते थे।

2) चार्ल्स लिंडबर्ग और अब्राहम लिंकन दोनों ने ही Doctor of Law डिग्री की शिक्षा प्राप्त की थी। दोनों व्यक्ति को Non-fiction किताबें पढ़ना पसंद था।

3) दोनों व्यक्तियों को 26 साल की उम्र में एक लड़की से प्यार हुआ जिसका नाम ‘Anne’ था और दोनों केस में Anne की उम्र 22 साल थी।

4) दोनों व्यक्तियों की पत्नी अच्छे परिवार से थीं और फ्रेंच भाषा बोलती थी। दोनों व्यक्तियों का विवाह अपने एक रिश्तेदार के घर सादगीपूर्वक हुआ था।

5) जहां अब्राहम लिंकन राष्ट्रपति होने की वजह से व्हाइट हाउस में रहते थे वहीं चार्ल्स लिंडबर्ग एक प्रसिद्ध व्यक्ति थे और उनकी कई अमेरिकी राष्ट्रपतियों से दोस्ती थी। इस वजह से चार्ल्स का व्हाइट हाउस में आना-जाना लगा रहता था।

6) अब्राहम लिंकन ने अपना प्रसिद्ध भाषण जिस जगह दिया था, चार्ल्स लिंडबर्ग का प्रसिद्ध भाषण भी उसी जगह के पास दिया गया था।

7) लेकिन जहाँ अब्राहम लिंकन (Abraham Lincoln) को जीवन में कड़े संघर्षों का सामना करना पड़ा, उसके बदले में चार्ल्स लिंडबर्ग बड़ी तेजी और आसानी से सफल, लोकप्रिय हुए क्योंकि ये उनके पूर्वजन्म के अच्छे कामों का फल था।

8) श्री योगानन्द परमहंस जी के बताए तथ्य को एक अमेरिकी लेखक Richard Salva ने अपनी रिसर्च से चेक करके सही पाया और एक प्रसिद्ध किताब The Reincarnation of Abraham Lincoln: Historical Evidence of Past Lives लिखी है।

9) चार्ल्स लिंडबर्ग और अब्राहम लिंकन के जीवन में लगभग 500 समानताएं हैं कि जिन्हें महज संयोग (Coincidence) नहीं कहा जा सकता. आप स्वयं विश्वास करेंगे कि चार्ल्स लिंडबर्ग और अब्राहम लिंकन एक ही आत्मा के दो रूप थे.

“Thoughts/Memory/Energy is Invisible/Micro collective coding system. Whenever it spark by any person/event/thought then it get recall by collective coding. Thoughts/Memory/Energy hard to destroy and after death it would try to find other body or source to keep survive. If new body with same Thoughts/Memory/Energy get connect or stay again then coded old memories get recall.”

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