देव पंचायत – सूक्ष्म विज्ञान

हिन्दू सनातन धर्म के ऋषिमुनियों ने मनुष्य की सर्वांग सुखाकारी केलिए वास्तुशास्त्र ओर घरके पूजा स्थानमे देव पंचायत की यंत्र स्वरूप स्थापना ओर पूजा का विधान दिया जो परिवार की सुखाकारी के साथ साथ दीर्घ आयु , निरोगी देह , सुखी दाम्पत्य प्राप्त करवा सके और अति महत्वपूर्ण पंचायत यंत्र स्थापन से व्यक्ति सहज ही अपने इष्टदेव को प्राप्त कर सके । निराकार ब्रह्म शिवजी के सर्वप्रथम पांच साकार स्वरूप प्रकट हुवे । सूर्य (अग्नि तत्व ) गणपति ( भूमि तत्व ) विष्णु ( वायु तत्व ) शक्ति ( जल तत्व ) रुद्र ( आकाश तत्व ) । हिन्दू धर्मके हरेक कुल गोत्र के तमाम देवी देवता इन पांच प्रधान स्वरुपों का ही अंश है । सूर्यदेव से अग्निदेव , अश्विन कुमार , गायत्री , सावित्री , ये सब सूर्यदेव की अंश शक्ति है । नारायण विष्णु से राम , कृष्ण , बुद्ध , नरसिंह , परशुराम , वराह बिगेरे सभी भगवान विष्णु के अंश अवतार है । शक्ति से संसारकी तमाम देवियां , दस महाविद्या , हरेक कुलगोत्र की कुलदेवी , योगिनी , यक्षिणी ये तमाम शक्ति ( महामाया ) के अंश अवतार है । शिव से सभी रुद्र अवतार , सभी भैरव , क्षेत्रपाल , वीर ये सभी शिवके अंश है । गणपति से सभी द्वादश गणपति स्वरूप भगवान गणेशजी के अंश है । इस तरह देवपंचायत पूजासे तमाम देवी देवताओं की पूजा हो जाती है जो सर्वश्रेष्ठ पूजा विधान है । मनुष्य देह भी पंचतत्वों से बना है । अग्नि , वायु , जल , भूमि , आकाश इस पांचों तत्त्वका समन्वय ही निरोगी दीर्घ आयु दे सकता है । एक भी तत्त्वकी कमी देह पीड़ा और तत्व के नाश से देहावसान हो जाता है । इसलिए हम चाहे शक्ति उपासक हो या वैष्णव हो सर्वांग सुखाकारी केलिए अपने इष्टदेव को प्रधान स्वरूप के साथ अन्य चारो देवताओ को पंचायतमें पूजा करना हितकर है । इस सूक्ष्म विज्ञान को समझते हुवे हमारे ऋषिमुनियों ने हिंदुओ के घरमे पंचायत पूजा का विधान दिया । सभी पांच प्रधान देवता विविध तत्वके स्वामी ओर विविध तत्व के कारक है । इसलिए मध्यमे जिस आराध्य देवताओ का स्थापन किया जाता है तब उनके चारो ओर ईशान , अग्नि , नैऋत्य , वायव्य कोण पर देवशक्ति की प्रबल ऊर्जा को पूर्ण जागृति केलिए चौकस देवी देवता ( तत्वों ) को चोककस कोने पर चौकस नापसे स्थापित करने से एक शक्तिशाली यंत्र बनता है । 27 इंच × 14 इंच का आसन पर मध्यमे आपके इष्टदेव ओर नीचे प्रस्तुत कोष्टक मुजब बाकी कोने पर बाकी चारो देवताओ का स्थापन दिव्य पंचायतन यंत्र बनता है । अगर बड़ी जगमे स्थापन करना हो तो इस नापके बेज मुजब बडा कर सकते है । सभी पंचावयतमे प्रथम गणेश पूजन अति आवश्यक है ।

पूजा करना हमारी संस्कृति का अभिन्न अंग है। पूजा व प्रार्थना करना ईश्वर को मनुष्य की ओर से दिया गया धन्यवाद है। अक्सर देखने में आता है कि लोग अपने पूजागृहों में विभिन्न देवी-देवताओं के कई विग्रह (मूर्ति) का अम्बार लगाए रखते हैं, हालांकि ये उनकी श्रद्धा का विषय है लेकिन हमारे शास्त्रों में प्रत्येक गृहस्थ के लिए पांच देवों की पूजा का नियम बताया गया है। जिसे ‘पंचायतन’ कहा जाता है.

सनातन धर्म में “पंचायतन” पूजा श्रेष्ठ मानी गई है। ये पांच देव हैं- गणेश, शिव, विष्णु, दुर्गा (देवी) व सूर्य शास्त्रानुसार प्रत्येक गृहस्थ के पूजागृह में इन पांच देवों के विग्रह या प्रतिमा होना अनिवार्य है। इन 5 देवों के विग्रहों को अपने ईष्ट देव के अनुसार सिंहासन में स्थापित करने का भी एक निश्चित क्रम है। किस देव का पंचायतन सिंहासन में किस प्रकार रखा जाता है.

  1. गणेश पंचायतन-

यदि आपके ईष्ट गणेश हैं तो आप अपने पूजागृह में “गणेश पंचायतन” की स्थापना करें।
इसके लिए आप सिंहासन के ईशान कोण में विष्णु, आग्नेय कोण में शिव, मध्य में गणेश, नैर्ऋत्य कोण में सूर्य एवं वायव्य कोण में देवी विग्रह को स्थापित करें।

  1. शिव पंचायतन-

यदि आपके ईष्ट शिव हैं तो आप अपने पूजागृह में ‘शिव पंचायतन’ की स्थापना करें। इसके लिए आप सिंहासन के ईशान कोण में विष्णु, आग्नेय कोण में सूर्य, मध्य में शिव, नैर्ऋत्य कोण में गणेश एवं वायव्य कोण में देवी विग्रह को स्थापित करें।

  1. विष्णु पंचायतन-

यदि आपके ईष्ट विष्णु हैं तो आप अपने पूजागृह में ‘विष्णु पंचायतन’ की स्थापना करें। इसके लिए आप सिंहासन के ईशान कोण में शिव, आग्नेय कोण में गणेश, मध्य में विष्णु, नैर्ऋत्य कोण में सूर्य एवं वायव्य कोण में देवी विग्रह को स्थापित करें।

  1. दुर्गा (देवी) पंचायतन-

यदि आपकी ईष्ट दुर्गा (देवी) हैं तो आप अपने पूजागृह में ‘देवी पंचायतन’ की स्थापना करें। इसके लिए आप सिंहासन के ईशान कोण में विष्णु, आग्नेय कोण में शिव, मध्य में दुर्गा (देवी), नैर्ऋत्य कोण में गणेश एवं वायव्य कोण में सूर्य विग्रह को स्थापित करें।

  1. सूर्य पंचायतन-

यदि आपके ईष्ट सूर्यदेव हैं तो आप अपने पूजागृह में ‘सूर्य पंचायतन’ की स्थापना करें। इसके लिए आप सिंहासन के ईशान कोण में शिव, आग्नेय कोण में गणेश, मध्य में सूर्य, नैर्ऋत्य कोण में विष्णु एवं वायव्य कोण में देवी विग्रह को स्थापित करें। पंचायत स्थापन करने से घर के वास्तुदोष निर्मूल हो जाता है । वास्तु मत मुजब दक्षिणमुखी घर शौर्य , साहस देता है । शेर ,सट्टा , लॉटरी , अचानक धन लाभ , उत्तरमुखी घर राजनीति में सफलता बिगैर देता है ऐसे ही व्यक्ति क्या पाना चाहता है ये जानने के बाद उनके जन्माक्षर की ग्रहदशा देखकर किस देवपंचायत स्थापन करना चाहिए ये निर्णय हो सकता है ।

महानारायण आप सभी धर्मप्रेमी जनो पर सदैव कृपा करें यही प्रार्थना सह .. श्री मात्रेय नमः

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