कई लोग या सारे लोगो के मन मे कुछ न कुछ पाने की इच्छा हमेशा होती कोई 50 हजार महीना , कोई 1 लाख , कोई 1 करोड़ महीना कमान चाहता ह । कोई फैक्ट्री डालना चाहता ह , कोई बड़ी कंपनी में नोकरी चाहता ह कोई सरकारी नोकरी चाहता ह । मतलब सब की कुछ न कुछ इच्छा जरूर होती ह जीवन मे ।।
अब साधारण तोर पर कैसे निर्धारित किया जाए की आपको ये मिलेगा या नही । इच्छाएं तो बहुत ह पर आप इन सब के लिए कर्म करोगे या नही या ये सब हवा बाजी ह । क्या आप सच मे इतने योग्य की आप को ये सब मिल जाये ।। क्या आपका व्यक्तित्व सोच विचार ऐसा ह की आप ये सब प्राप्त कर लोगे ।
इसमे सबसे बड़ी भूमिका होती ह लगन की डिग्री ओर लग्नेश की अवस्था ओर डिग्री की । कोई भी लगन हो या कोई भी ग्रहः हो वो अपने आप को 30 डिग्री के दायरे तक सीमित रखता ह ।। इस 30 डिग्री में मूलतः 3 अवस्था होती ह पर इसको 5 भागो में विभाजित किया जाता ह ।
1 बाल अवस्था ( 1°- 6,°) 2 कुमार अवस्था (7°-12 °) ,3 युवा अवस्था (13°-18 ),4 वर्ध अवस्था ( 19°-24 )ओर 5 मृत अवस्था ( 25°- 30 )
अब आप आपका लगन देखिए इन मे से किस अवस्था मे आता ह ।।
1 बाल अवस्था – आपके लगन की डिग्री 1 से 6 यानी आपका लगन बाल अवस्था का । ओर आप जिस चीज की चाह जीवन मे करेगे उसको पाने के लिए आप मेहनत नही कर पाएंगे ।। आप किसी भी कार्य को जिस गति से प्रराम्भ करेगे उसको कुछ समय बाद उस गति से नही कर पाएंगे ।। कुछ समय बाद आप छोड़ देंगे उस कार्य को । बाल स्वभाव का लगन होने के कारण ये मान कर चलिये बालक ने हठ पकड़ ली शुरुवात में तो किसी के वश में नही आएगा वो पर कुछ ही समय बाद वो हट खत्म हो जाएगी और वो बालक उस चीज को भूल जाएगा । इसी बालक की तरह आपका व्यक्तित्व होगा जो आपके लक्ष्य प्राप्ति में कही न कही सदैव बाधक बनेगा ।।
2 कुमार अवस्था – आपके लगन की डिग्री 7 से 12 डिग्री के बीच ह तो आप यकीन मानिए आप अब उस बालक से कही ज्यादा परिपक्व हो चुके पर कई बार उस बालक की झलक आपके व्यक्तित्व में दिखाई देती ह कई बार युवा अवस्था की झलक भी दिखाई ह । तो आप के लगन की डिग्री 7 से 12 के बीच ह आपका व्यक्तित्व ऐसा ह की आप मेहनत करेंगे और आपको आपकी मंजिल की प्राप्ति होगी ही होगी ।
3 युवा अवस्था – आपके लगन की डिग्री 13 से 18 के बीच ह तो आपके लिए ये किसी बड़े राजयोग से कम नही ह आप अगर सोच लगे तो आपके लिए कुछ भी असंभव नही ह आप बिना निराश हुए लगातार मेहनत कर अंत में अपनी मंजिल तक पहुच ही जायेंगे आप मे इतनी ऊर्जा ह आपका व्यक्तित्व इतना बलशाली ह की आपको सफल होने से कोई नही रोक सकता ह बस जरूरत ह आपकी क्षमता को पहचानने की ।।
4 वर्ध अवस्था – क्या आपका लगन 19 से 24 डिग्री ह आप सोच तो बहुत बड़ी रखते ह पर वर्ध लगन होने के कारण आप जीवन मे अपनी मंजिल को प्राप्त करने के लिए पर्याप्त मेहनत ही नही कर पाएंगे क्योकि वर्धवस्था में मेहनत नही होती केवल ज्ञान दिया जा सकता ह आपकी परवर्ती किसी ज्ञानी की भांति होगी । कुछ असफलताओं के बाद आप निराश हो जायेगे ओर अपनी मंजिल को छोड़ देंगे या मंजिल को छोटा कर लेंगे ।।
5 मृत अवस्था – क्या आपका लगन 25 से 30 डिग्री का ह तो आप ये मान कर चलिये आपने निराशा का भाव शुरू से ही रहा ह आप निराशावादी इंसान ह आप जीवन मे किसी भी चीज की इच्छा कर ले आप उसको पाने के लिए प्रयत्न ही नही करेगे यदि प्रयत्न किया भी तो हर छोटी से छोटी मंजिल आपको पहाड़ जैसी मुश्किल लगेगी क्योकि आपका व्यक्तित्त्व ही इस प्रकार का ह आप एक प्रकार से निष्क्रिय तरीके से जीवन का निर्वाह करते रहेंगे ।।
आपको इस्पस्ट रूप से कहूं तो आपके लगन की डिग्री आपका 25 % जीवन निर्धारित कर देती ह ओर आपके लग्नेश की डिग्री, इस्थति , लग्नेश की अन्य ग्रहों के साथ युक्ति , लग्नेश का नक्षत्र , लग्नेश पर अन्य ग्रहों की दृस्टि 25 % जीवन तक कर देते ह ।। यानी लगन और लग्नेश आपके जीवन मे बहुत बड़ा बहुत अहम योगदान देते ह । इन्ही से आपका जीवन संचालित होता ह लगन और लग्नेश एक मजबूत और एक कमजोर कुंडली की बुनियाद तैयार करते ह ।।
कुंडली मे कितने भी दर्योग ह पर लगन और लग्नेश मजबूत ह तो आपका वो दर्योग कुछ नही बिगाड़ पाएंगे । और इसके विपरीत कितने भी राजयोग लष्मी योग ह ओर लगन और लग्नेश पीड़ित ह तो कुछ नही मिलने वाला जीवन मे ।। ओर आज भी आप इस इस्थति मे हो गुरुजी शनि द्वादश भाव मे ह तो क्या फल होगा ??
गुरुजी मेरी कुंडली मे धन भाव का स्वामी ओर लाभ भाव का स्वामी उच्च का ह पर मुझे तो कुछ नही मिला जीवन मे ? बेटा तेरा लगन 2 डिग्री का ह लग्नेश की इस्थति भी खराब ह तो मिलेगा कैसे ।। तुम्हारा व्यक्तित्व, क्षमता ऐसी नही ह की तुमको उसका लाभ मिल सके । धनेश लाभेश उच्च के ह तो तुमको मिलने वाला धन एटीएम में ह उसकी चाबी केवल आपका लगन और लग्नेश ह आपकी चाबी ही खराब ह कैसे आएगा धन आप उस धन को पाने योग्य ही नही ह तो कैसे मिलेगा । वही दूसरी ओर किसी का लगन और लग्नेश मजबूत अवस्था मे ह पर धन और लाभ भाव के स्वामी पीड़ित ह पर उसमें योग्यता ह तो जितना चाहेगा कमा सकता ह हो सकता ह इसमे समय लगे इसके लिए बहुत मेहनत करनी पड़े पर ये सब करने के लिए वो हमेशा तैयार ह वो जीवन मे कभी हार मानेगा ही नही ।।
भाग्य भाव का स्वामी या भाग्य भाव पीड़ित हो जाये तो उसके सामने वाले भाव को देख लेना चाहिए यानी तीसरे भाव को क्योकि भाग्य से सब कुछ नही मिलता । जातक अपने पराक्रम से भी उनती कर लेता ह । तीसरा भाव ओर इसका स्वामी भी पीड़ित हो जाये तो तीसरे से एकादश भाव को देख लेना चाहिए क्योंकि यही बैठता ह यही स्थान ह लग्नेश का आपके जीवन के drivar का अगर ये भी पीड़ित ह तो फिर सब भगवान भरोसे ह उच्च के दशमेश ह म्हलष्मी योग ह इसी तरह योग देखते देखते ही जीवन निकल जायेगा कुछ नही मिलने वाला ।।
आज लगन पर पोस्ट थी अलगी पोस्ट लग्नेश की इस्थति पर लिखूंगा ये एक सामान्य पोस्ट ह जरूरी नही हर कुंडली पर लागू हो । गौरव पुरोहित एस्ट्रोलॉजर & जेमोलॉजिस्ट जयपुर