ऋषि मुनियों के उधेश्य ज्योतिष आज से हजारों साल पहले लिखी गयी सिद्धांत है ।

ऋषि मुनियों के उधेश्य ज्योतिष आज से हजारों साल पहले लिखी गयी सिद्धांत है । जिसका मुख्य उद्देश्य था , आत्मा की यात्रा कैसी होगी ,आत्मा ऊर्ध्व गामि हॉगा या अधोगामि हॉगा उन सब चीजो का बात करता है।

  1. पहली राशि मेष है और आठवीं राशि बृश्चिक है।काल पुरुष की कुंडली मे पहली राशि का भी स्वामि मङ्गल है और आठवीं राशि का भी स्वामी मंगल ही है। यह विचारणीय तथ्य है।
    ■पहले भाव से जीवन की यात्रा सुरु होता है और अष्ठम भाव तक अपनी छोटी यात्रा समाप्त कर लेता है, 1 और 8 के वीच तक का ही जीवन है।।
    💐 इसी लिए कहा गया है जो व्यक्ति अष्ठम भाव को अच्छे तरह से जान लेता है वह महासुख को प्राप्त कर लेता है। इसी का ब्याख्या भगवान कृष्ण ने गीता में अर्जुन को बताया था जिसे जान कर अर्जुन मोह माया से मुक्त हो कर कर्म में विश्वाश करना सीखा।
    💐अतः धर्म और मोक्ष ये मनुष्य के हाथ मे है ।
    💐अर्थ और काम ये प्रारब्ध के हाथ मे है।
    💐इसी किये गीता में भगवान कृष्ण ने अर्जुन को कहा था कर्म करना तेरा कर्तव्य है, तू कर्म कर फल की चिंता मत करो।
    👍इसे जो अच्छे तरह से समझ जॉयेगा वह ज्योतिष को समझ जॉयेगा
    【ज्योतिष राशिफल बताना नही है जिसके पिच्छे लोग भाग रहे है। 1000 वर्ष पहले लिखी गयी ज्योतिष सिद्धांतों का उद्दयेश्य ये नही हो सकता जिसके पिच्छे लोग लगे हुए है】
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