अष्टक वर्ग (सर्वाष्टक वर्ग) के महत्वपूर्ण सूत्र

👉 अष्टक वर्ग में यदि लग्न नवम, दशम तथा एकादश भाव को 30 से अधिक अंक प्राप्त हो तो इसको अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है ऐसे जातक हमेशा तरक्की करने वाला, इच्छा पूर्ति करने वाला तथा उसका जीवन अत्यंत सुखमय में कहा गया है 👇

👉 यदि दशम भाव से ज्यादा अंक द्वितीय है तथा एकादश भाव में होंगे तो यह अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है ऐसे जातक के पास धन हमेशा बनी रहेगी,जितना करेगा उससे ज्यादा प्राप्त होगी तथा संघर्ष ज्यादा नहीं करनी पड़ेगी 👇

👉 अष्टक वर्ग में चतुर्थ भाव को यदि 30 से ज्यादा अंक प्राप्त हो साथ में द्वितीय तथा लग्न को भी 30 से ज्यादा अंक प्राप्त हो तो इसको अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है ऐसे जातक खुद से मजबूत, सुख को भोगने वाला तथा उसको सुखों की कमी कभी नहीं रहेगी 👇

👉 अष्टक वर्ग में शुभ भावों पर अंको का अधिक होना श्रेष्ठ माना गया है 👇

👉 अष्टक वर्ग में यदि नवम भाव को 28 से ज्यादा अंक प्राप्त हो तो ऐसा जातक का भाग्य हमेशा साथ देगा तथा इससे अधिक होने पर जातक का भाग्य हमेशा बलवान रहेगा तथा भाग्य के लिए श्रेष्ठ कहा गया है 👇

👉 अष्टक वर्ग में 12वे भाव का अंक लग्न तथा एकादश भाव से यदि ज्यादा होंगे तो भी इसको अच्छा नहीं माना गया है ऐसा जातक कभी धन संचय नहीं कर पाएगा साथ में उसका खर्च में कभी नियंत्रण नहीं रहेगा 👇

👉 3,6,8,12 भावों से अधिक अंक यदि अन्य कोई भाव पर भी हो तो इसको अच्छा माना गया है 👇

👉 अष्टक वर्ग में 6,8, 12 भाव में जितना कम अंक होंगे उतना ही अच्छा माना गया है यहां पर अधिक अंकों का होना जीवन ज्यादा कष्टकारी हो जाता है 👇

👉 1,2,4,5,9,10,11 इन भावों पर 24 से कम अंक प्राप्त हो तो इन भावों से संबंधित फल अत्यंत कम मिलेगा 👇

👉 अष्टकवर्ग के अनुसार यदि जातक/जातिका की #चंद्र_राशि में 30 से अधिक अंक हो तो जातक एक सुखी वैवाहिक जीवन जीता है ..ऐसे मामले में जहां जातक/जातिका के पास 25 या 25 से कम अंक हों तो उनका वैवाहिक जीवन दुख भरा हो सकता है

Design a site like this with WordPress.com
Get started